Tuesday, November 17, 2020

इम्तिहान

 


इम्तिहान

दीवार मे कंही एक छोटा झरोखा

कबूतरो का मित्र  युग्ल अनोखा

कबूतर पंखुडी पूंछ शनै शनै हिलाता

गुटरगूं कर प्रेम का इजहार जताता

मादा कबूतर दिखाती अजनबी खेल

मस्त रगं से ना उपजा कोइ सुमेल

नेत्र बंद कर लिए मस्ती उसकी देख

गुटरगूं पर प्रेम भाव नहीं उगा संरेख

अगले दिन  कबूतर ने नीति बदली

घास तिनको से घोसले की नींव रखी

मेहनत से दिखा जीवन दर्शन का भाव

मादा का दिखाइ दिया बदलता स्वभाव

कबूतर फिर पंखुडी पूंछ को हिलाता

गुटरगूं कर  नया गीत घर का गाता

विश्वास का भाव जगाता प्रेम दिखाया

गर्दन झुकाती मादा  नयन भर आया

प्रेम भाव को मादा ने कैसे परखा

कर्मठता को भी प्रेम तराजू मे रखा

प्रेम आंनद नहीं सृजन रूप कहलाता

सहवास वास से नया संसार बसाता

इम्तिहान से  गुजरा नर मेहमान

साहस कर्मठता का लिया संज्ञान

मानव भी खग जग से कुछ सीखे

प्रेमसरिता बहे चंहु ओर सुख दिखे

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