इम्तिहान
दीवार मे कंही एक छोटा झरोखा
कबूतरो का मित्र युग्ल अनोखा
कबूतर पंखुडी पूंछ शनै शनै हिलाता
गुटरगूं कर प्रेम का इजहार जताता
मादा कबूतर दिखाती अजनबी खेल
मस्त रगं से ना उपजा कोइ सुमेल
नेत्र बंद कर लिए मस्ती उसकी देख
गुटरगूं पर प्रेम भाव नहीं उगा संरेख
अगले दिन कबूतर ने नीति बदली
घास तिनको से घोसले की नींव रखी
मेहनत से दिखा जीवन दर्शन का भाव
मादा का दिखाइ दिया बदलता स्वभाव
कबूतर फिर पंखुडी पूंछ को हिलाता
गुटरगूं कर नया गीत घर का गाता
विश्वास का भाव जगाता प्रेम दिखाया
गर्दन झुकाती मादा नयन भर आया
प्रेम भाव को मादा ने कैसे परखा
कर्मठता को भी प्रेम तराजू मे रखा
प्रेम आंनद नहीं सृजन रूप कहलाता
सहवास वास से नया संसार बसाता
इम्तिहान से गुजरा नर मेहमान
साहस कर्मठता का लिया संज्ञान
मानव भी खग जग से कुछ सीखे
प्रेमसरिता बहे चंहु ओर सुख दिखे
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