बूंद
मंद मंद हवा का शोर
झर झर पडी बूंदे
धरती हो उठी भाव विभौर
फैली चहुं ओर मुकंद
भू माटी ने किया स्वागत
धरा मुस्कराहट ले आइ
बीज हुआ नमी से अवगत
अंकूर उठा,हरित बन आइ
बादलों की गडगडहाट से
आलिगंन मे डूबा जंगल
बूंदो की आहट से
सर्व जीवन हुआ मंगल
कोलाहल में डूबा खग विहार
भोजन के खुले,उनके द्वार
नइ उडान भरने को तैयार
बूंदो से हुआ जीवन का संचार

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