Sunday, October 11, 2020

बूंद

                       बूंद


मंद मंद हवा का शोर

झर झर पडी बूंदे

धरती  हो उठी भाव विभौर

फैली चहुं ओर मुकंद

भू माटी ने किया स्वागत

धरा मुस्कराहट ले आइ

बीज हुआ नमी से अवगत

अंकूर उठा,हरित बन आइ

बादलों की गडगडहाट से

आलिगंन मे डूबा जंगल

बूंदो की आहट से

सर्व जीवन हुआ मंगल

कोलाहल में डूबा खग विहार

भोजन के खुले,उनके द्वार

नइ उडान भरने को तैयार

बूंदो से हुआ जीवन का संचार


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