साहसी जीवन
ज्वार के पौधों के बीच विचरती
भोजन को ढूंढती एक काबरी
एकाग्रता से लक्ष्य को तलाशती
शत्रु से अनजान हुइ खगचरी
दबे पांव शत्रु आगे बढ रहा
नेवले सा शैतान लग रहा
झट से उस पर हमला कर दिया
खगचरी को कसकर पकड लिया
संकट की घडी दम घूटने लगा
फडफडाहाट से पंख गिरने लगा
उर्जा संचयी बन छूटने का प्रयास हुआ
ज्वार काटते किसान की हुर हुर से
नेवले का लक्ष्य निष्फल हुआ
घायल होकर खगचरी उड चली
हैरान हुआ मैं, देख उसका साहस
फिर से पौधों के बीच आ बैठी
मौत की जंग को समझा एक उपहास
पल पल खतरा,किसे आभास है
संघर्ष मे ही जीवन का साथ है
साहस जंहा शीर्ष पर है
वंहा जीवन निबार्ध गतिमान है

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