छलित गोद
प्रकृति की गोद,व्यापक सार
जीवन पोषक,संपदा अपार
मनुज कर्म छलित व्यवहार
असहज जीवन निरर्थक आधार
कदम कदम पर
विभिन्नताएं पादप दल की
विस्मय दूनिया जंतु दल की
विलुप्त होने के कगार पर है
नदी झरने पहाड अदभूत है
राह सबके बाधित है
जंहा जंहा तेरी नजर है
वंहा सर्व जीवन कुंठित है
सबका श्वसन अब घुट रहा है
कर्म तेरा दंभ से सज रहा है
इसी भ्रम से सिर उंचा रखना
मृत्यु का सामान तैयार रखना
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