Saturday, October 17, 2020

केदारनाथ त्रासदी

 

केदारनाथ त्रासदी

प्रकृति का अनुपम उपहार

केदारनाथ की पर्वतमाला

ऐतिहासिक शिवा मन्दिर

अध्यात्मवाद का उजाला

उंचे उचें पर्वत शिखरों से

खुशी मिले अपरम पार

टेढे मेढे संकरी  राहो से

हृदय में भय  का संचार

केदारनाथ धाम की उंचाई

घाटियों की उमडती तन्हाई

मेघा बरसे, ले गर्जन भाव

सरिता में उफना जल भराव

आसमां में बादल फटा कैसा

हर यात्री भय से सन्न,सहसा

प्रलयकारी जल का बहाव बना

जीवजंतु , दरिया का ग्रास बना


जन  मानस हुआ परेशान

पशु पक्षी  सब  हुए बेजान

लुढकते पत्थर ,गिरते पहाड

उजड  रहा  जैसे  ब्रह्मांड

पल  भर का  महाप्रलय

संतप्त  हुआ   निर्भालय

बिखरे पडे  नर  कंकाल

पशु पक्षी,सब मरे अकाल

महेश दत्ता का सारा परिवार

निमंत्रित थे  कई रिस्तेदार

केदारनाथ धाम की यात्रा पर

प्रलय से उजडा उनका संसार

अनहोनी का गुनाहगार कौन

मां बाप संतप्त,मौन ही मौन

चमन से खिले फूल टूटे ऐसे

प्रकृति कहर से रूठे भी कैसे

मंथन में डूबा गया  संसार

प्रकृति पर क्यों इतना भार

स्वच्छंदता  पर हुआ प्रहार

काल रूप,क्षमता से लाचार


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