केदारनाथ त्रासदी
प्रकृति का अनुपम उपहार
केदारनाथ की पर्वतमाला
ऐतिहासिक शिवा मन्दिर
अध्यात्मवाद का उजाला
उंचे उचें पर्वत शिखरों से
खुशी मिले अपरम पार
टेढे मेढे संकरी राहो से
हृदय में भय का संचार
केदारनाथ धाम की उंचाई
घाटियों की उमडती तन्हाई
मेघा बरसे, ले गर्जन भाव
सरिता में उफना जल भराव
आसमां में बादल फटा कैसा
हर यात्री भय से सन्न,सहसा
प्रलयकारी जल का बहाव बना
जीवजंतु , दरिया का ग्रास बना
जन मानस हुआ परेशान
पशु पक्षी सब हुए बेजान
लुढकते पत्थर ,गिरते पहाड
उजड रहा जैसे ब्रह्मांड
पल भर का महाप्रलय
संतप्त हुआ निर्भालय
बिखरे पडे नर कंकाल
पशु पक्षी,सब मरे अकाल
महेश दत्ता का सारा परिवार
निमंत्रित थे कई रिस्तेदार
केदारनाथ धाम की यात्रा पर
प्रलय से उजडा उनका संसार
अनहोनी का गुनाहगार कौन
मां बाप संतप्त,मौन ही मौन
चमन से खिले फूल टूटे ऐसे
प्रकृति कहर से रूठे भी कैसे
मंथन में डूबा गया संसार
प्रकृति पर क्यों इतना भार
स्वच्छंदता पर हुआ प्रहार
काल रूप,क्षमता से लाचार
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