Tuesday, October 13, 2020

जांबाज गौरेया

       जांबाज गौरेया





खजूर का पेड,अदभूत  छतरी जैसा

गौरेयां का समुह नइ बस्ती जैसा

पत्तों से धागे चटक चटक कर वे लाती

बडी तकनीकी से महल वे अपना बनाती

गौंरेयां ने घोसलों मे अंडे दे रखे थे

घोसलों से बच्चों की चहचहाट आ रही थी

बाहर बैठी गौरेया कुछ,मानो पहरे दे रखे थे

अनुशासन प्रिय गौरेया,विशेज्ञ लग रही थी

एक दिन वंहा काली नागिन  आ गइ

हुंकार उसकी सुनकर,गौरेयां सजग बन गइ

शोर कर वंहा मौजूद किसान को जगाया

भागी नागिन,आज तो खतरा टल गया

दिन का उजाला था, खतरा टल गया

रात का पहरा कैसा, यह विचार बन गया

आधी रात, नागिन शिखर पर चढ गइ

अंडे,बच्चे, कुछ गौरेयां को निगल गइ

सुरक्षित बची गौरेयां,मंथन में जुट गइ

बैठ समुह में,भविष्य की शुद् में खो गइ

कंहा रह गइ कमियां,ऐसा सोचने लगी

वृद्ध जांबाज , उपदेश उनको देने लगी

गौरेया कृष्ण सा अर्जुन को उपदेश देती रही

कृषकों को उल्हाने दे देकर तंज कसती रही

खलिहानों मे दाने छोडने वाला कृषक कहां गया

खेत खलिहान आग में स्वाहा करता चला गया

किसान का बडा दिल तो देखो

अंधड,ओले और भूकंप से कांप उठता है

हमारा मस्तिष्क चीर के तो देखो

चील,बाज,नागिन,हर पल खतरा मंडराता है

मनुज पेडों को अंधाधूधं काट रहा है

दाने दाने को अपना समझ रहा है

माया की छाया में हमे भूल रहा है

हम नहीं बची,स्व कब्र वो खोद रहा है

पहले कितना अच्छा जमाना था

किसान थोडा सा भी अभिमानी न था

दो दो मास तक खेत खाली रहते थे

भेड बकरी मवेशी  चरते रहते थे

हम जग की जांबाज गौरेया  हैं

हवा मे उडकर बाते करने वाली

वीर गौरेयां, हम बडी अदभूत है

अपने वंश को आगे बढाने वाली

नए सवेरे का आगाज होने वाला है

नइ किरण नइ आशा,आगे हाथ बढाना है

हमें हार का नहीं जीत का जश्न मनाना है

आदमी की तरह फंदा नहीं उठाना है

हम अपने घोषलें ऐसे पेड पर बनाऐगें

जंहा जालिम नागिन जैसा खतरा न हो

हम  गौरेयां  सीना तानकर जियेगें

दुश्मन हमारे आज अंहकार में न हो

रात भर गौरेयां का प्रवचन चलता रहा

बहनों,आदमी अब हमारा साथी नहीं रहा

प्रकृति को नत होकर हमें चलना है

फिर से एक नया संसार बसाना है

धर्मबीर,गौरेयां तुम सच्चे दिल वाली हो

तुम सचमूच जांबाज कहलाने लायक हो

मैंनें तुम्हारे दर्द को पहचान लिया है

शब्दों मे भाव सृजन सबको परोस दिया है

पहाड जैसे दुख पर वो हंस नहीं सकी

प्रवचन सुनकर वे उडने  को तैयार हो सकी

सुबह की किरणे जैसे ही धरती पर पडी

दिशा ज्ञान जान,गौरेयां ने नइ उडान भरी


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