सावन
रिमझिम बरसात से
हरे भरे पत्ते खिल उठे
ठंडक पाकर सावन से
मेंढक सब जाग उठे
खेतो मे फैली हरियाली
सावन का रंग दिखाइ दे
किसानो की खुशहाली
हर चेहरे पर दिखाइ दे
सूखी जमीन पर अकूंर फूटा
रेगिस्तान मे हरियाल लौटा
धरा पर खिल उठी कली कली
देखो,जीवन को गति कैसे मिली
मस्त बच्चे बाहर निकले
सावन का मजा उठाने को
छप छप करते रहे,मनचले
गली मे शोर मचाने को
वृद्धजन रखें पांव संभल सभंल के
कंही गिर ना जाएं पांव फिसलके
बादलों को देखे आंख फाड फाड के
रास्ते क्यों रोक लिए आज उनके
हवा सावन की,घूमड घूमड आइ
सखियां सारी ले अगंडाइ
दीवाने करे शब्दो की हेरा फेरी
तन्हाइ पर रचे वे शायरी
वीरान छतो पर चढ गए मयूर
पंख फैला नाचे प्रेम मे अति चूर
गर्दन नीचे कर सोचे मयूरी
प्रेम का भाव समझना जरूरी
प्रकृति कर रही आज स्नान
जीवों का होता सा पूरा अरमान
विषाक्त हवा ताजगी से भरी
भू लोक बना सावन का आभारी

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