Sunday, October 11, 2020

सावन

                       सावन               


रिमझिम बरसात से

हरे भरे पत्ते खिल उठे

ठंडक पाकर सावन से

मेंढक सब जाग उठे

खेतो मे फैली हरियाली

सावन का रंग दिखाइ दे

किसानो की खुशहाली

हर चेहरे पर दिखाइ दे

सूखी जमीन पर अकूंर फूटा

रेगिस्तान मे हरियाल लौटा

धरा पर खिल उठी कली कली

देखो,जीवन को गति कैसे मिली

        मस्त बच्चे  बाहर निकले

सावन का मजा उठाने को

छप छप करते रहे,मनचले

गली मे शोर मचाने को

वृद्धजन रखें पांव संभल सभंल के

कंही गिर ना जाएं पांव फिसलके

बादलों को देखे आंख फाड फाड के

रास्ते क्यों रोक लिए आज उनके

हवा सावन की,घूमड घूमड आइ

सखियां सारी ले अगंडाइ

दीवाने करे शब्दो की हेरा फेरी

तन्हाइ पर रचे  वे शायरी

वीरान छतो पर चढ गए मयूर

पंख फैला नाचे प्रेम मे अति चूर

गर्दन नीचे कर  सोचे मयूरी

प्रेम का भाव समझना जरूरी

        प्रकृति कर रही आज स्नान

        जीवों का होता सा पूरा अरमान

विषाक्त हवा ताजगी से भरी

        भू लोक बना सावन का आभारी


No comments:

Post a Comment

दिल भरी मैंना

  दिल भरी मैंना तोता कह रहा अपनी मैंना से पहली सी ह्दयी नहीं रही तुम चंचल अलबेली कौमुदी सी ...